हरियाणा में किसानों को 75% सब्सिडी पर सोलर वाटर पंप – PM-KUSUM योजना
हरियाणा में किसानों को 75% सब्सिडी पर सोलर वाटर पंप – PM-KUSUM योजना
हरियाणा एक कृषि प्रधान राज्य है और राष्ट्रीय खाद्यान्न भंडार में महत्वपूर्ण योगदान करता है। किसानों को सिंचाई की पर्याप्त सुविधाएँ उपलब्ध कराने और डीजल पंपसेट पर होने वाले अतिरिक्त खर्च को कम करने के उद्देश्य से नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा विभाग, हरियाणा द्वारा किसानों को 3 एचपी से 10 एचपी क्षमता तक के सौर ऊर्जा चालित पंप उपलब्ध करवाए जा रहे हैं। इन पंपों पर किसानों को कुल 75% अनुदान (30% केंद्र सरकार व 45% राज्य सरकार) प्रदान किया जा रहा है।
यह योजना न केवल किसानों को स्वच्छ ऊर्जा उपलब्ध कराएगी बल्कि सिंचाई लागत को भी घटाएगी और किसानों की आय बढ़ाने में सहायक सिद्ध होगी।
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प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान (पीएम-कुसुम)
यह योजना नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय, भारत सरकार की एक महत्वाकांक्षी योजना है, जिसके अंतर्गत तीन घटक शामिल हैं –
1. घटक-A: किसान अपनी बंजर भूमि पर 500 किलोवाट से 2 मेगावाट तक के सौर संयंत्र स्थापित कर सकते हैं। उत्पन्न बिजली को वितरण निगम (DISCOM) द्वारा निर्धारित दर पर खरीदा जाएगा।
2. घटक-B: पूरे देश में 20 लाख स्वतंत्र सौर कृषि पंप लगाए जाएंगे। हरियाणा में इसका क्रियान्वयन एनआरई विभाग कर रहा है।
3. घटक-C: कृषि फीडरों का सौरकरण किया जाएगा। अतिरिक्त बिजली को DISCOM खरीदेगा और राशि सीधे किसान के बैंक खाते में जमा होगी।
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ऑफ-ग्रिड सौर पंप (घटक-B)
हरियाणा में किसानों को 3 एचपी, 5 एचपी, 7.5 एचपी और 10 एचपी क्षमता के सौर पंप उपलब्ध होंगे।
अनुदान पैटर्न इस प्रकार है –
क्षमता किसान अंशदान केंद्र अनुदान राज्य अनुदान– 3–7.5 HP 25% 30% 45%
10 HP 25% (7.5 HP के अनुसार) 30% शेष राशि राज्य द्वारा वहन
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लाभार्थी
व्यक्तिगत किसान जिनके पास कृषि भूमि है और जिनके नाम पर बिजली का कनेक्शन नहीं है।
गौशाला, जल उपयोगिता संघ तथा सामूहिक/क्लस्टर आधारित सिंचाई प्रणाली।
छोटे और सीमांत किसानों को प्राथमिकता।
क्लस्टर या समूह के लिए 10 एचपी से अधिक क्षमता तक पंप की अनुमति (प्रति किसान अधिकतम 5 एचपी की गणना से)।
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पात्रता शर्तें
1. किसान के नाम पर कृषि भूमि होना आवश्यक।
2. आवेदक के नाम पर कृषि बिजली कनेक्शन न हो।
3. पहले से लाभ प्राप्त किसान दोबारा पात्र नहीं।
4. परिवार पहचान पत्र (PPP) अनिवार्य।
5. खेत में ड्रिप/स्प्रिंकलर या भूमिगत पाइपलाइन होना जरूरी।
6. केंद्रीय भूजल प्राधिकरण (CGWA) द्वारा अधिसूचित क्षेत्रों में केवल मौजूदा डीजल पंप को सौर पंप में परिवर्तित किया जा सकेगा (शर्त – माइक्रो इरिगेशन का उपयोग हो)।
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आवेदन प्रक्रिया
किसान ऑनलाइन आवेदन saralharyana.gov.in पोर्टल के माध्यम से कर सकते हैं।
आवेदन के समय किसान को अपना अंशदान (यूज़र शेयर) आरटीजीएस/एनईएफटी के जरिए जमा करना होगा।
आवेदन पहले आओ-पहले पाओ के आधार पर स्वीकृत होंगे।
किसी प्रकार का ऑफलाइन/हार्ड कॉपी आवेदन स्वीकार्य नहीं होगा।
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कार्यान्वयन व निगरानी
योजना मार्केट मोड में लागू होगी और किसान अपनी पसंद के सप्लायर का चुनाव कर सकते हैं।
राज्य पोर्टल पर सभी पंपों की स्थापना और उपयोग का डाटा 15-15 मिनट में राष्ट्रीय पोर्टल से सिंक्रोनाइज होगा।
शिकायत निवारण की सुविधा भी ऑनलाइन उपलब्ध है।
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विशेष प्रावधान
सौर पंप के साथ यूनिवर्सल सोलर पंप कंट्रोलर (USPC) उपलब्ध होगा, जिससे किसान अपने पंप की क्षमता तक किसी भी कृषि उपकरण (जैसे आटा चक्की, चारा काटने की मशीन आदि) को भी चला सकते हैं।
यदि समय पर USPC उपलब्ध न हो सके, तो सामान्य नियंत्रक के साथ पंप लगाया जाएगा और अतिरिक्त राशि वापस कर दी जाएगी।
👉 यह योजना किसानों के लिए एक बड़ा अवसर है, जिससे वे सिंचाई पर खर्च घटाकर न केवल आत्मनिर्भर बन सकते हैं बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान दे सकते हैं।
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