भारत की पहली म्यूटेंट केला किस्म कावेरी वामन लॉन्च, किसानों के लिए बड़ा फायदा
भारत को मिली पहली ‘म्यूटेंट केला किस्म’ – कावेरी वामन: परमाणु तकनीक से कृषि में क्रांतिकारी कदम
BARC संस्थापक दिवस 2025 के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में परमाणु ऊर्जा विभाग (DAE) के सचिव व परमाणु ऊर्जा आयोग (AEC) के अध्यक्ष डॉ. अजीत कुमार मोहंती ने इस नए वैराइटी को भारतीय हॉर्टिकल्चर के लिए क्रांतिकारी बताया। उन्होंने कहा कि यह सफलता आयनाइजिंग रेडिएशन के उपयोग द्वारा उद्यानिकी फसलों के सुधार की दिशा में एक बड़ी छलांग है, जो आने वाले समय में कृषि उत्पादन और गुणवत्ता को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगी।
BARC के निदेशक श्री विवेक भासिन ने इस किस्म के पीछे की वैज्ञानिक प्रक्रिया को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि गामा किरणों से प्रेरित उत्परिवर्तन (Gamma Ray-Induced Mutagenesis) तकनीक की मदद से यह किस्म विकसित की गई है। यह तकनीक पौधों में उपयोगी परिवर्तन लाकर उन्हें अधिक मजबूत, अधिक उपजाऊ और अधिक अनुकूल बनाने में सहायता करती है। उन्होंने यह भी कहा कि कावेरी वामन किसानों में अत्यधिक लोकप्रिय ग्रांडे नाइन (Grande Naine) का उन्नत रूप है। यह BARC की रणनीति में आए बदलाव को दर्शाता है, जिसके अंतर्गत पारंपरिक फसलों से आगे बढ़कर फलों और वनस्पति जनित पौधों को भी प्राथमिकता दी जा रही है।
नई किस्म का विकास ICAR-नेशनल रिसर्च सेंटर फॉर बनाना (NRCB), तिरुचिरापल्ली के वैज्ञानिकों के सहयोग से हुआ। यहां TBM-9 का अनेक मौसमों और स्थानों पर कठोर परीक्षण किया गया ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि किसान इसे बड़े पैमाने पर अपनाने के योग्य मानें। वर्षों के विश्लेषण, फील्ड ट्रायल और वैज्ञानिक मूल्यांकन के बाद TBM-9 को अंतिम रूप दिया गया और ‘कावेरी वामन’ के नाम से जारी किया गया।
कावेरी वामन अपने मूल पौधे की तुलना में करीब 1.5 महीने पहले पककर तैयार हो जाता है, जिससे किसानों को तेज उत्पादन चक्र मिल जाता है। इससे न केवल खेत की उत्पादकता बढ़ती है, बल्कि किसान बाजार में जल्दी फल भेजकर बेहतर कीमत भी प्राप्त कर सकते हैं। जल्दी पकने वाली किस्में मौसम के जोखिम को भी कम करती हैं, जिससे नुकसान की संभावना घटती है।
कार्यक्रम में डॉ. मोहंती ने यह भी कहा कि फसल सुधार, परमाणु ऊर्जा विभाग के उस मिशन का हिस्सा है जिसके तहत न्यूक्लियर साइंस को समाज की भलाई के लिए उपयोगी बनाया जा रहा है। उन्होंने देशभर के ICAR संस्थानों और राज्य कृषि विश्वविद्यालयों की सराहना की, जिन्होंने वर्षों से BARC द्वारा विकसित किस्मों का मूल्यांकन कर उन्हें किसानों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
कुल मिलाकर, कावेरी वामन आने वाले वर्षों में भारतीय केले की खेती को नई पहचान देगा और किसानों को अधिक सुरक्षित, अधिक लाभदायक और अधिक आधुनिक कृषि से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

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