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टिश्यू कल्चर से बनेगा 15.90 लाख बीज गन्ना, मिलों को किया आवंटन

अब टिश्यू कल्चर लैब में तैयार होगा 15.90 लाख बीज गन्ना! गन्ना किसानों को मिलेगा रोग-रोधी बीज, विभाग ने बनाया बड़ा प्लान


गन्ना किसानों के लिए राज्य सरकार ने एक बड़ा कदम उठाते हुए टिश्यू कल्चर लैब्स की पूरी क्षमता का उपयोग करने की रणनीति बनाई है। कृषि व गन्ना विकास विभाग ने इस वित्तीय वर्ष में 15.90 लाख बीज गन्ना तैयार करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। यह बीज गन्ने की ऐसी उन्नत किस्में होंगी, जो पारंपरिक खेती की तुलना में ज्यादा शुद्ध, रोग-रोधी और उच्च उत्पादकता देने वाली होंगी।

राज्य सरकार का कहना है कि किसानों को जल्द से जल्द उन्नत किस्म का बीज गन्ना उपलब्ध कराया जाएगा ताकि खेती में गुणवत्ता बढ़ सके और उत्पादन स्थिर रहे। टिश्यू कल्चर तकनीक से तैयार गन्ना बीज आने वाले समय में किसानों की आय बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।


प्रदेश में इस समय कई प्रमुख चीनी मिलों और शोध संस्थानों में टिश्यू कल्चर प्रयोगशालाएं (Tissue Culture Lab) एक साथ काम कर रही हैं। इनमें बिजनौर की स्नेह रोड चीनी मिल, मेरठ की मवाना और दौराला चीनी मिल, लखीमपुर की बेलरायां, बरेली की बहेड़ी, आजमगढ़ की सठियांव, बाराबंकी की हैदरगढ़, सीतापुर की हरगांव, हरदोई की लोनी और शाहजहांपुर की गन्ना शोध परिषद शामिल हैं। हालांकि बरेली की मीरगंज चीनी मिल में वर्तमान में बीज उत्पादन बंद है।

सरकार के अनुसार इन सभी लैब्स को उनकी क्षमता के अनुसार बीज उत्पादन का लक्ष्य आवंटित कर दिया गया है और इस लक्ष्य को तय समय में पूरा करने की तैयारी की जा रही है।


क्यों जरूरी है टिश्यू कल्चर बीज?

सामान्य तरीके से तैयार होने वाले बीज गन्ने में अक्सर मिलावट, बीमारी या कम विकसित कल्मों की समस्या देखी जाती है, जिससे उत्पादन प्रभावित होता है। लेकिन टिश्यू कल्चर बीज वैज्ञानिक तकनीक से तैयार होता है जिसकी वजह से—

  • बीज पूरी तरह शुद्ध होता है
  • किसी भी बीमारी का असर लगभग शून्य
  • बढ़वार तेज
  • गन्ने की गुणवत्ता उच्च
  • उत्पादन क्षमता ज्यादा

यही कारण है कि सरकार ने तय किया है कि आगे से किसानों तक अधिकतम बीज इसी विधि से तैयार कर भेजा जाएगा।


हर लैब अपनी क्षमता के बराबर करेगी उत्पादन

गन्ना विकास विभाग के अनुसार हर लैब अपनी अधिकतम क्षमता के बराबर बीज तैयार करेगी, ताकि लक्ष्य को समय पर पूरा किया जा सके। विभाग कहता है कि इस योजना से किसानों को कम समय में बेहतर गुणवत्ता वाला बीज उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी, साथ ही यह खेती के दीर्घकालीन विकास में मील का पत्थर साबित होगा।

अभी तक इन लैब्स के माध्यम से 3,94,500 बीज गन्ना का उत्पादन किया जा चुका है। साथ ही गुणवत्ता जांच की बहु-स्तरीय प्रणाली भी लागू की गई है, ताकि किसानों तक सबसे बेहतर सामग्री ही पहुंचे।


कितनी लैब को कितना लक्ष्य?

सरकार ने हर लैब को उसकी क्षमता के आधार पर उत्पादन लक्ष्य दिया है। जैसे कि—

  • मवाना मेरठ – 2,50,000
  • दौराला मेरठ – 50,000
  • बिजनौर – 2,00,000
  • बहेड़ी – 1,00,000
  • बेलरायां – 1,40,000
  • हरगांव – 50,000
  • लोनी – 2,00,000
  • हैदरगढ़ – 3,00,000
  • सठियांव – 2,50,000
  • शाहजहांपुर – 50,000

कुल लक्ष्य – 15,90,000 बीज गन्ना


किसानों को मिलने वाले प्रमुख लाभ

इस योजना के सफल होने पर किसानों को कई तरह के फायदे मिलेंगे—

  • रोग-रोधी किस्में आसानी से उपलब्ध होंगी
  • उत्पादन में लगातार इजाफा होगा
  • ज्यादा मीठा और ज्यादा दाना देने वाली किस्में मिलेंगी
  • बेकार या संक्रमित बीजों से छुटकारा मिलेगा
  • खेत में एक समान विकास देखने को मिलेगा

इन बीजों के कारण गन्ना मिलों में रिकवरी बेहतर होगी, जिससे गन्ना किसान और मिल दोनों को वित्तीय लाभ होगा।


बीमारियों पर नियंत्रण और ज्यादा पैदावार

अक्सर गन्ना फसल में रेड रॉट, ग्रास सिंड्रोम जैसी बीमारियां फैल जाती हैं, जिससे पैदावार घट जाती है। टिश्यू कल्चर तकनीक इन समस्याओं को लगभग पूरी तरह रोक देती है। इसलिए सरकार इसे “लंबी अवधि का समाधान” मान रही है।


कुल मिलाकर यह योजना राज्य के गन्ना क्षेत्र में तकनीकी क्रांति की शुरुआत मानी जा रही है। अगर तय लक्ष्य समय पर पूरे होते हैं तो राज्य अगले दो साल में टिश्यू कल्चर आधारित बीज उत्पादन में देश का सबसे बड़ा केंद्र बन सकता है। सरकार का उद्देश्य सिर्फ उत्पादन बढ़ाना नहीं, बल्कि किसानों को वैज्ञानिक खेती की ओर ले जाना भी है।

गन्ना किसानों की आय बढ़ाने, रोगों को रोकने, उच्च उत्पादकता प्राप्त करने, और स्थायी खेती को बढ़ावा देने में टिश्यू कल्चर बीज आने वाले समय में निर्णायक भूमिका निभाने वाला है।


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