फसल नुकसान मुआवजा: 22.90 लाख किसानों के खातों में ₹6,805 करोड़
बेमौसमी बारिश से तबाह फसलों के बाद किसानों को बड़ी राहत, 10 हजार करोड़ के पैकेज से अब तक 6,805 करोड़ सीधे खातों में पहुंचे
राज्य के किसानों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। बेमौसमी बारिश से खरीफ फसलों को हुए भारी नुकसान के बाद सरकार ने जिस 10 हजार करोड़ रुपये के ऐतिहासिक राहत पैकेज का ऐलान किया था, उस पर तेजी से अमल शुरू हो चुका है। फसल सर्वे पूरा होने के बाद शुरू की गई इस फसल नुकसान मुआवजा प्रक्रिया के तहत अब तक 6,805 करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि सीधे किसानों के बैंक खातों में ट्रांसफर की जा चुकी है। सरकार के इस कदम से लाखों किसान परिवारों को संबल मिला है, जिनकी फसलें अचानक हुई बारिश और मौसम की मार से बर्बाद हो गई थीं।
इस साल मानसून के बाद बदले मौसम ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी थीं। कई जिलों में तेज और अनियोजित बारिश के कारण खड़ी फसलें गिर गईं, कटाई के लिए तैयार अनाज भीग गया और खेतों में पानी भरने से फसल उत्पादन पर गहरा असर पड़ा। खासतौर पर खरीफ सीजन की फसलें सबसे ज्यादा प्रभावित हुईं, जिससे किसानों की आय पर सीधा संकट खड़ा हो गया। हालात को देखते हुए सरकार ने तुरंत फसल सर्वे कराने के निर्देश दिए, ताकि वास्तविक नुकसान का आकलन कर प्रभावित किसानों को समय पर मुआवजा दिया जा सके।
फसल नुकसान आकलन के बाद सरकार ने राहत पोर्टल के जरिए आवेदन प्रक्रिया शुरू की। इस पोर्टल पर राज्य भर से करीब 33 लाख किसानों ने फसल नुकसान मुआवजे के लिए आवेदन किया। जांच के बाद अब तक 27 लाख से ज्यादा किसानों के आवेदन मंजूर हो चुके हैं। बीते 10 दिनों में 22.90 लाख किसानों के खातों में 6,805 करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि जमा कराई जा चुकी है। सरकार ने साफ किया है कि शेष पात्र किसानों को भी जल्द ही मुआवजे की रकम ट्रांसफर की जाएगी।
इस राहत पैकेज की सबसे अहम बात यह है कि मुआवजा दरों में बढ़ोतरी की गई है। पहले जहां प्रति हेक्टेयर 11 हजार रुपये की सहायता मिलती थी, वहीं अब इसे बढ़ाकर 22 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर कर दिया गया है। दो हेक्टेयर की सीमा के भीतर किसानों को अधिकतम 44 हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी जा रही है। इससे छोटे और सीमांत किसानों को सबसे ज्यादा लाभ मिला है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार राज्य के करीब 18 हजार गांवों में से 17 हजार गांवों के किसानों को इस राहत पैकेज का लाभ मिल चुका है। यह दिखाता है कि योजना की ग्राउंड लेवल पहुंच कितनी मजबूत है। वन और पर्यावरण मंत्री अर्जुन मोढवाडिया ने कहा कि सरकार का लक्ष्य हर उस किसान तक मदद पहुंचाना है जो बेमौसमी बारिश से प्रभावित हुआ है।
मुआवजे के साथ-साथ सरकार ने किसानों की आय बढ़ाने के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर फसलों की खरीद को प्राथमिकता दी है। इस वर्ष 15 हजार करोड़ रुपये तक MSP खरीद का लक्ष्य रखा गया है। इसमें मूंगफली, मूंग, उड़द और सोयाबीन जैसी प्रमुख फसलें शामिल हैं। अब तक 10.49 लाख टन खरीफ उपज की खरीद हो चुकी है, जिसकी कीमत करीब 7,537 करोड़ रुपये है। इससे 4.75 लाख किसानों को सीधा लाभ मिला है।
दाल उत्पादक किसानों के लिए भी यह बड़ी राहत है। अब तक 2.18 लाख किसानों के खातों में 3,468 करोड़ रुपये MSP के तहत जमा कराए जा चुके हैं। इसके लिए 114 तालुकों में 317 खरीद केंद्र बनाए गए हैं। साथ ही सरकार ने ऐलान किया है कि 22 दिसंबर से अरहर (तुअर) की 100% खरीद MSP पर की जाएगी, जिससे किसानों को बाजार के उतार-चढ़ाव से राहत मिलेगी।
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर मुआवजा भुगतान और MSP पर सरकारी खरीद किसानों के आत्मविश्वास को मजबूत कर रही है। डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) से पारदर्शिता बढ़ी है और बिचौलियों की भूमिका लगभग खत्म हो गई है।
कुल मिलाकर 10 हजार करोड़ का राहत पैकेज, फसल नुकसान मुआवजा, और MSP खरीद योजना बेमौसमी बारिश से प्रभावित किसानों के लिए संजीवनी साबित हो रही है। इससे किसानों को न सिर्फ तत्काल राहत मिल रही है, बल्कि भविष्य की खेती के लिए भी मजबूत आधार तैयार हो रहा है।

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