PM Kusum Yojana 2025: किसानों को 40,521 सोलर पंप, 60% सब्सिडी के साथ आवेदन शुरू
किसानों को सब्सिडी पर 40,521 सोलर पंप देगी सरकार
उत्तर प्रदेश के किसानों के लिए राहत और आत्मनिर्भरता की दिशा में सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान (पीएम कुसुम योजना) के तहत राज्य में इस बार 40,521 सोलर पंप किसानों को भारी सब्सिडी पर उपलब्ध कराए जाएंगे। इस योजना का उद्देश्य किसानों को सिंचाई के लिए बिजली और डीजल पर निर्भरता से मुक्त करना, खेती की लागत कम करना और सौर ऊर्जा को बढ़ावा देना है। खास बात यह है कि इस योजना के लिए आवेदन करने की अंतिम तारीख 15 दिसंबर 2025 तय की गई है, यानी किसानों के पास अब केवल कुछ ही दिन शेष हैं।
राज्य कृषि विभाग के अनुसार, योजना के तहत सोलर पंप लेने के लिए किसानों का विभागीय पोर्टल पर पंजीकृत होना अनिवार्य है। आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन रखी गई है ताकि पारदर्शिता बनी रहे और ज्यादा से ज्यादा पात्र किसानों तक योजना का लाभ पहुंच सके। इच्छुक किसान www.agriculture.up.gov.in पर जाकर आवेदन कर सकते हैं।
इस बार सरकार ने सोलर पंप वितरण का लक्ष्य काफी बड़ा रखा है। 60 प्रतिशत तक सब्सिडी दिए जाने के कारण सोलर पंप की वास्तविक कीमत किसानों के लिए काफी कम हो जाएगी। इससे छोटे और सीमांत किसान भी आधुनिक सिंचाई सुविधाओं का लाभ उठा सकेंगे। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि सोलर पंप के इस्तेमाल से न सिर्फ सिंचाई की समस्या हल होगी, बल्कि किसानों की आय में भी बढ़ोतरी होगी।
कृषि विभाग द्वारा जारी जानकारी के अनुसार, अलग-अलग क्षमता के सोलर पंप पर अलग-अलग राशि का अनुदान तय किया गया है। उदाहरण के तौर पर, 2 एचपी डीसी-एसी सरफेस पंप पर किसानों को 98,593 रुपये का अनुदान मिलेगा। वहीं 2 एचपी डीसी सबमर्सिबल पंप पर 1,00,215 रुपये और 2 एचपी एसी सबमर्सिबल पंप पर 99,947 रुपये की सब्सिडी दी जाएगी। यदि किसान 3 एचपी डीसी सबमर्सिबल पंप चुनते हैं तो उन्हें 1,33,621 रुपये, जबकि 3 एचपी एसी सबमर्सिबल पंप पर 1,32,314 रुपये का अनुदान मिलेगा।
इतना ही नहीं, बड़ी क्षमता वाले पंपों पर भी सरकार आकर्षक सब्सिडी दे रही है। 5 एचपी एसी सबमर्सिबल पंप पर 1,88,038 रुपये तक का अनुदान तय किया गया है। वहीं 7.5 एचपी एसी और 10 एचपी एसी सबमर्सिबल पंप पर किसानों को अधिकतम 2,54,983 रुपये तक का लाभ मिलेगा। इस तरह किसान अपनी जरूरत और जमीन के हिसाब से 2 एचपी से लेकर 10 एचपी तक का सोलर पंप चुन सकते हैं।
आवेदन प्रक्रिया को सरल लेकिन जिम्मेदार बनाया गया है। किसान को ऑनलाइन आवेदन के समय 5,000 रुपये की टोकन मनी जमा करनी होगी। यह राशि आवेदन की पुष्टि के लिए ली जाती है, ताकि फर्जी या गैर-जरूरी आवेदन रोके जा सकें। बुकिंग कंफर्म होने के बाद किसान के पंजीकृत मोबाइल नंबर पर सूचना भेजी जाएगी। यदि किसी जिले में आवेदन संख्या तय सीमा से अधिक हो जाती है, तो लाभार्थियों का चयन ई-लॉटरी के माध्यम से किया जाएगा।
सोलर पंप योजना का एक अहम पहलू यह है कि किसानों को बोरिंग से जुड़े नियमों का सख्ती से पालन करना होगा। कृषि विभाग ने स्पष्ट किया है कि सोलर पंप लगाने से पहले खेत में बोरिंग होना जरूरी है। 2 एचपी पंप के लिए 4 इंच बोरिंग, 3 एचपी और 5 एचपी पंप के लिए 6 इंच बोरिंग, जबकि 7.5 एचपी और 10 एचपी पंप के लिए 8 इंच बोरिंग अनिवार्य की गई है। यदि निरीक्षण के समय बोरिंग अधूरी पाई गई, तो आवेदन रद्द किया जा सकता है और टोकन राशि भी जब्त हो सकती है।
सरकार का कहना है कि सोलर पंप योजना से किसानों को कई प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष फायदे मिलेंगे। सबसे बड़ा फायदा यह है कि सोलर पंप लगने के बाद किसानों को बिजली बिल या डीजल खर्च की चिंता नहीं रहेगी। इससे सिंचाई की लागत लगभग शून्य हो जाएगी। समय पर सिंचाई मिलने से फसल की पैदावार बढ़ेगी और गुणवत्ता में भी सुधार होगा। लंबे समय में यह योजना किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में मदद करेगी।
पर्यावरण के लिहाज से भी यह योजना बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। सोलर पंप से कार्बन उत्सर्जन कम होगा और प्रदूषण में कमी आएगी। सरकार का लक्ष्य है कि खेती को पर्यावरण-अनुकूल बनाया जाए और नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों का अधिकतम उपयोग हो। यही कारण है कि पीएम कुसुम योजना को देश की सबसे महत्वपूर्ण कृषि-ऊर्जा योजनाओं में गिना जाता है।
राज्य सरकार का मानना है कि बिजली कटौती, महंगे डीजल और सिंचाई की अनिश्चितता जैसी समस्याओं से किसान लंबे समय से जूझ रहे हैं। ऐसे में सोलर पंप एक स्थायी समाधान के रूप में सामने आए हैं। कई जिलों में पहले से सोलर पंप का उपयोग कर रहे किसान बता रहे हैं कि इससे खेती का खर्च काफी घट गया है और फसलों को समय पर पानी मिल रहा है।
जो किसान इस योजना का लाभ उठाना चाहते हैं, उन्हें सलाह दी जाती है कि वे अंतिम तारीख का इंतजार न करें। समय रहते ऑनलाइन आवेदन, आवश्यक दस्तावेज अपलोड और टोकन राशि जमा कर प्रक्रिया पूरी कर लें। आवेदन स्वीकृत होने के बाद विभागीय टीम खेत का निरीक्षण करेगी और फिर सोलर पंप लगाने की प्रक्रिया शुरू होगी।
कुल मिलाकर, 40,521 सोलर पंपों का वितरण उत्तर प्रदेश के किसानों के लिए एक ऐतिहासिक अवसर है। यह योजना न सिर्फ किसानों की सिंचाई समस्याओं का समाधान करेगी, बल्कि उन्हें ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर भी बनाएगी। यदि किसान समय पर आवेदन करते हैं और सभी नियमों का पालन करते हैं, तो वे कम लागत में आधुनिक तकनीक का लाभ उठाकर अपनी खेती को नई दिशा दे सकते हैं।

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