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2025 में भारतीय ट्रैक्टर उद्योग ने रचा इतिहास, घरेलू बिक्री 10 लाख यूनिट के पार

 2025 बना भारतीय ट्रैक्टर उद्योग के लिए मील का पत्थर, घरेलू बिक्री पहली बार 10 लाख यूनिट के पार

2025 में भारतीय ट्रैक्टर उद्योग ने रचा इतिहास, घरेलू बिक्री 10 लाख यूनिट के पार

भारतीय कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए साल 2025 ऐतिहासिक उपलब्धियों से भरा हुआ रहा। इस वर्ष भारतीय ट्रैक्टर उद्योग ने ऐसा कीर्तिमान स्थापित किया, जो अब तक कभी देखने को नहीं मिला। पहली बार किसी एक कैलेंडर वर्ष में घरेलू ट्रैक्टर बिक्री 10 लाख यूनिट से ज्यादा दर्ज की गई, वहीं ट्रैक्टर एक्सपोर्ट भी 1 लाख यूनिट का आंकड़ा पार करने में सफल रहा।

यह उपलब्धि न केवल ट्रैक्टर इंडस्ट्री की मजबूती को दर्शाती है, बल्कि यह भी साफ करती है कि किसानों की क्रय शक्ति, ग्रामीण आय और कृषि गतिविधियों में लगातार सुधार हो रहा है।


घरेलू ट्रैक्टर बिक्री में जबरदस्त उछाल, 20% सालाना ग्रोथ

ट्रैक्टर मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (TMA) के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में घरेलू ट्रैक्टर बिक्री 10.90 लाख यूनिट तक पहुंच गई। इसके मुकाबले 2024 में यह आंकड़ा 9.10 लाख यूनिट रहा था। यानी साल-दर-साल आधार पर करीब 20 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि दर्ज की गई।

यह ग्रोथ दर्शाती है कि भारतीय ट्रैक्टर बाजार अब केवल बड़े किसानों तक सीमित नहीं है, बल्कि छोटे और मध्यम किसान भी तेजी से ट्रैक्टर खरीद की ओर बढ़ रहे हैं।


एक्सपोर्ट फ्रंट पर भी भारत की मजबूत पकड़

घरेलू बाजार के साथ-साथ ट्रैक्टर निर्यात (Tractor Export) के मोर्चे पर भी भारत ने शानदार प्रदर्शन किया।
2024 में जहां एक्सपोर्ट आंकड़ा 97,745 यूनिट था, वहीं 2025 में यह बढ़कर 1,05,006 यूनिट हो गया। यह लगभग 7 प्रतिशत की वार्षिक बढ़ोतरी को दिखाता है।

खास बात यह है कि अफ्रीका, लैटिन अमेरिका और एशियाई देशों में भारतीय ट्रैक्टरों की मांग लगातार बढ़ रही है, जिससे भारत की ग्लोबल ट्रैक्टर हब के रूप में पहचान और मजबूत हुई है।


दिसंबर 2025 में ट्रैक्टर बिक्री ने पकड़ी रफ्तार

साल के अंतिम महीने दिसंबर 2025 में ट्रैक्टर बाजार में खासा उत्साह देखने को मिला।
इस दौरान:

  • घरेलू ट्रैक्टर बिक्री में लगभग 35% की बढ़ोतरी दर्ज हुई
  • दिसंबर 2025 में बिक्री 69,890 यूनिट तक पहुंची
  • जबकि दिसंबर 2024 में यह आंकड़ा 50,993 यूनिट था

वहीं एक्सपोर्ट भी दिसंबर में 22% की सालाना बढ़त के साथ 9,815 यूनिट तक पहुंच गया। यह साफ संकेत देता है कि त्योहारी सीजन, रबी बुवाई और बेहतर नकदी प्रवाह ने ट्रैक्टर डिमांड को मजबूती दी।


2024 बनाम 2025: ट्रैक्टर इंडस्ट्री का प्रदर्शन

यदि 2024 और 2025 की तुलना की जाए तो तस्वीर बेहद साफ नजर आती है:

  • घरेलू बिक्री में लगभग 20% की ग्रोथ
  • ट्रैक्टर एक्सपोर्ट में करीब 7% की बढ़ोतरी
  • दिसंबर महीने में घरेलू बिक्री में 35% की छलांग
  • दिसंबर एक्सपोर्ट में 22% की मजबूती

ये आंकड़े बताते हैं कि भारतीय ट्रैक्टर उद्योग लगातार ग्रोथ ट्रैक पर बना हुआ है।


ट्रैक्टर बिक्री बढ़ने के प्रमुख कारण

इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स के अनुसार 2025 में ट्रैक्टर बिक्री में आई इस तेजी के पीछे कई अहम वजहें रहीं:

✔ अनुकूल मौसम और अच्छी फसल

बेहतर मानसून और मजबूत खरीफ उत्पादन से किसानों की आय में सुधार हुआ, जिससे ट्रैक्टर खरीदने की क्षमता बढ़ी।

✔ ग्रामीण कैश फ्लो में सुधार

ग्रामीण इलाकों में नकदी की उपलब्धता बेहतर होने से कृषि मशीनरी की मांग को बल मिला।

✔ सरकारी नीतियां और सब्सिडी

कम GST दर, राज्य सरकारों की सब्सिडी योजनाएं और आसान ट्रैक्टर लोन विकल्पों ने खरीद को आसान बनाया।

✔ फाइनेंस और रिटेल सपोर्ट

बैंकों और NBFCs की ओर से आसान फाइनेंस स्कीम्स ने छोटे किसानों को भी ट्रैक्टर खरीदने का मौका दिया।


ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिला मजबूत सहारा

ऑटो और कृषि क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रैक्टर बिक्री में तेजी सीधे-सीधे ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूती का संकेत है।
खरीफ सीजन की अच्छी पैदावार, जलाशयों में पर्याप्त जल स्तर और रबी बुवाई में तेजी ने कृषि गतिविधियों को गति दी, जिसका असर ट्रैक्टर मांग पर साफ दिखा।


GST और नीतिगत फैसलों का सकारात्मक प्रभाव

रेटिंग एजेंसियों के अनुसार, 2025 में ट्रैक्टर वॉल्यूम ग्रोथ लगभग 20 प्रतिशत रही, जो यह दर्शाती है कि सरकारी नीतियां और टैक्स स्ट्रक्चर उद्योग के लिए सहायक साबित हुए।
वहीं निर्यात में बढ़ोतरी से यह भी साफ है कि मेड-इन-इंडिया ट्रैक्टर अब वैश्विक बाजार में मजबूत पहचान बना चुके हैं।


2026 के लिए भी पॉजिटिव आउटलुक

कुल मिलाकर, 2025 भारतीय ट्रैक्टर उद्योग के लिए रिकॉर्ड-ब्रेकिंग साल रहा। मजबूत डिमांड, बेहतर ग्रामीण आय और ग्लोबल एक्सपोर्ट ग्रोथ को देखते हुए उम्मीद की जा रही है कि 2026 में भी ट्रैक्टर बिक्री में तेजी बनी रहेगी

यह ट्रेंड न सिर्फ ट्रैक्टर मैन्युफैक्चरर्स के लिए अच्छा संकेत है, बल्कि भारतीय कृषि और ग्रामीण विकास के लिए भी बेहद सकारात्मक माना जा रहा है।


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